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Saturday, 30 January 2016

गीत

प्यार के गाँव में दंश के छाँव में,
खुबसुरत कहीं भी नजारे नही,
आसमां में जली कुछ चीताएं हैं ये,
जो चमकते हैं सारे सितारे नही,
इन सितारों से रिश्ता न तोंडूंगी मैं
दिन का साथ तुम भी नही छोड़ना,
रात से ही मुझे ब्याह रचने दो तुम,
हो सके तो नया तुम भी कुछ जोड़ना,
उम्र भर खुद का बनकर रहा सूर्य जब
चाँद ने कह दिया तुम हमारे नही,.।
प्यार की नाव ले प्राण दो सिन्धुं में,
देखते-देखते ख्वाब में खो गये,
पर जहर से भरी दंश का ज्वार देख
दोनों वापस तटो के तरफ हो गये,
टूट कर रह गये,डूब कर रह गये
दोनों पहुंचे कभी भी किनारे नही...।
चींटियाँ काटते रात दिन बाटते
मुस्कारते हुए सीधे-साधे से हम,
तुम गलत मैं सही,मैं सही तुम गलत
बंध सके बस सदा कच्चे धांगे से हम,
एक-दूजे से हम एक उमर भर लड़े
वो भी जीते नही हम भी हारे नही,...।

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